शिवपुराण एवं अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, चतुर्थ ज्योतिर्लिंग का स्वरूप दो भागों में विभक्त है—ओंकारेश्वर और ममलेश्वर (Omkareshwar and Mamleshwar)। नर्मदा के मानधाता द्वीप (उत्तर तट) पर भगवान ओंकारेश्वर विराजमान हैं, जबकि नर्मदा के दक्षिण तट पर भगवान ममलेश्वर (अमलेश्वर) का प्राचीन मंदिर स्थापित है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दोनों मंदिरों के दर्शन से ही ज्योतिर्लिंग पूजन का पूर्ण पुण्य फल प्राप्त होता है। यहाँ दोनों मंदिरों के इतिहास, अंतर, पौराणिक कथा और सुगम कैब सेवा की पूरी जानकारी उपलब्ध है।
🔱 ओंकारेश्वर बनाम ममलेश्वर: तुलनात्मक तथ्य (Key Differences)
दोनों पावन ज्योतिर्लिंग स्थलों की मुख्य विशेषताएँ:
🌟 पौराणिक कथा एवं मुख्य आकर्षण (Highlights)
विन्ध्याचल पर्वत की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और ऋषियों के अनुरोध पर दो भागों—ओंकारेश्वर व अमलेश्वर (ममलेश्वर) में स्थिर हुए।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित यह मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशीदार पत्थर की दीवारों व ऐतिहासिक शिलालेखों के लिए प्रसिद्ध है।
नर्मदा नदी पर बने पुल या नाव (Boat Service) के जरिए श्रद्धालु 10-15 मिनट में एक तट से दूसरे तट पर जाकर दोनों दर्शन कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
आप किसी भी मंदिर में पहले दर्शन कर सकते हैं, लेकिन परंपरा अनुसार श्रद्धालु पहले मुख्य द्वीप पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करते हैं और तत्पश्चात नर्मदा पार कर ममलेश्वर मंदिर जाते हैं।
दोनों मंदिरों के बीच की दूरी मात्र 500 मीटर से 1 किलोमीटर के बीच है। नए पैदल पुल (New Bridge) से होकर श्रद्धालु 10 मिनट में एक मंदिर से दूसरे मंदिर पहुँच सकते हैं।


