पवित्र ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग जिस ॐ आकार के पर्वत पर स्थापित है, उसे मांधाता पर्वत के नाम से जाना जाता है। इस पावन भूमि का इतिहास महान सूर्यवंशी चक्रवर्ती सम्राट राजा मांधाता की कठोर तपस्या और उनके अलौकिक जीवन से जुड़ा हुआ है।
राजा मांधाता का जन्म सनातन इतिहास की सबसे अद्भुत और आश्चर्यजनक घटनाओं में से एक है। आइए जानते हैं राजा मांधाता के जन्म, देवराज इंद्र के आशीर्वाद और भगवान शिव से प्राप्त दिव्य वरदान की संपूर्ण पौराणिक गाथा।
📜 राजा मांधाता एवं ओंकारेश्वर: पौराणिक तथ्य (Quick Facts)
राजा मांधाता की कथा से जुड़ी मुख्य बातें एक नज़र में:
📌 कथा के 3 मुख्य अध्याय (Story Highlights)
संतान प्राप्ति हेतु यज्ञ के बाद पिता यौवनाश्व ने गलती से सिद्ध जल पी लिया, जिससे बालक का जन्म पिता की कोख से हुआ।
माता न होने पर इंद्र देव ने अपनी अमृतमयी तर्जनी उंगली बालक को पिलाई, जिससे मांधाता अत्यंत बलशाली और तेजस्वी बने।
ओंकारेश्वर पर्वत पर घोर तप करके उन्होंने शिव जी को प्रसन्न किया और इस क्षेत्र को ज्योतिर्लिंग के रूप में अमरता का वरदान दिलाया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
राजा मांधाता ने इस पर्वत पर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था। उनकी भक्ति और तपस्या के सम्मान में इस पूरे द्वीप/पर्वत का नाम मांधाता पर्वत पड़ा।
हाँ, श्रद्धालु मांधाता पहाड़ी पर स्थित प्राचीन महलों के दर्शन कर सकते हैं और लगभग 7 किलोमीटर लंबे मांधाता परिक्रमा मार्ग पर चलकर ओंकारेश्वर के सभी प्रमुख मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं।



