मां नर्मदा की पावन परिक्रमा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक दिव्य साधना है। श्री ओंकारेश्वर धाम से शुरू होने वाली इस परिक्रमा में लगभग 3,500 किलोमीटर का सफर तय किया जाता है। यात्रा के दौरान दोनों तटों (दक्षिण तट और उत्तर तट) पर अनेक प्राचीन आश्रम, मंदिर और तीर्थ स्थल स्थित हैं जहाँ परिक्रमावासी विश्राम करते हैं।
यदि आप परिक्रमा की तैयारी कर रहे हैं, तो जानिए मां नर्मदा परिक्रमा के मुख्य पड़ाव (Halt Stations), उनकी विशेषताएं और रुकने की व्यवस्था की संपूर्ण जानकारी।
🚩 नर्मदा परिक्रमा के प्रमुख पड़ाव (दक्षिण एवं उत्तर तट)
यात्रा के मुख्य पड़ाव स्थल और उनकी तट वार स्थिति:
📌 पड़ावों पर रुकने और व्यवस्था संबंधी नियम
नर्मदा परिक्रमा के नियम अनुसार सूर्यास्त के बाद यात्रा रोककर नजदीकी पड़ाव या आश्रम में रात्रि विश्राम करना अनिवार्य होता है।
मुख्य पड़ावों पर स्थानीय निवासियों व ट्रस्ट द्वारा परिक्रमावासियों को निशुल्क सात्विक भोजन (सदाव्रत) और चाय-पानी प्रदान किया जाता है।
कार या टैक्सी से यात्रा करने वाले श्रद्धालु मुख्य पड़ाव शहरों (जैसे जबलपुर, अमरकंटक, बड़वानी) में होटल या MP Tourism रिसॉर्ट्स में भी रुक सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
पैदल यात्रियों के लिए मार्ग में आने वाले गायत्री मंदिर, गजानन महाराज आश्रम और दत्त मंदिर उत्तम रहते हैं। गाड़ी से यात्रा करने वालों के लिए जिला मुख्यालयों व प्रसिद्ध तीर्थों पर रुकना बेहतर होता है।
हाँ, विमलेश्वर (मीठी तलाई) से उत्तर तट पर स्थित कबीरवड़/शुक्लतीर्थ जाने के लिए समुद्र या नदी के मुहाने को नाव द्वारा पार करने की विशेष व्यवस्था होती है।



