ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में प्रतिदिन आयोजित होने वाली आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि दिव्य ऊर्जा और भक्ति का अद्वितीय संगम है। नर्मदा नदी के तट पर गूंजते शंखनाद और मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव की आरती का साक्षी बनना प्रत्येक श्रद्धालु के लिए परम सौभाग्य की बात होती है।
मंदिर में दिनभर में तीन मुख्य आरतियाँ होती हैं—मंगला आरती, मध्याह्न भोग आरती, और शयन (शृंगार) आरती। प्रत्येक आरती का अपना विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।
🔔 ओंकारेश्वर मंदिर: आरती का समय और विवरण
🔱 ओंकारेश्वर आरती की मुख्य आध्यात्मिक मान्यताएं
🎲 चौपड़ पासों की परंपरा
ऐसी मान्यता है कि शयन आरती के बाद भगवान शिव और माता पार्वती रात में मंदिर के गर्भगृह में चौपड़ (पासे) खेलते हैं।
🌸 अलौकिक शृंगार दर्शन
संध्या आरती में ज्योतिर्लिंग को भांग, चंदन और सुंदर ताजे पुष्पों से सजाया जाता है, जिसका दर्शन अत्यंत फलदायी माना गया है।
🔔 सकारात्मक ऊर्जा का संचार
आरती के समय डमरू, झांझ और वैदिक श्लोकों की ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर दिव्य सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
सामान्य दिनों में आप सुबह मंदिर पहुंचकर आरती में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, सावन और महाशिवरात्रि जैसे त्योहारों के दौरान भीड़ के कारण पहले पहुंचना उचित रहता है।
आरती और दर्शन हेतु पारंपरिक और मर्यादित पोशाक (जैसे कुर्ता-पायजामा, धोती, साड़ी या सलवार-सूट) पहनने का सुझाव दिया जाता है।



