सनातन परंपरा में माँ नर्मदा (रेवा) ही एकमात्र ऐसी पावन नदी हैं जिनकी संपूर्ण परिक्रमा की जाती है। पुराणों के अनुसार, जहाँ गंगा जी में स्नान से और यमुना जी के जल-पान से पुण्य मिलता है, वहीं मां नर्मदा के केवल दर्शन मात्र से पापों का नाश हो जाता है।
नर्मदा परिक्रमा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन को बदल देने वाली एक दिव्य साधना है। चाहे आप यह परिक्रमा पदयात्रा (पैदल) के रूप में कर रहे हों या वाहनों (कैब/कार) के माध्यम से, आइए जानें माँ नर्मदा परिक्रमा का महत्व, प्रमुख पड़ाव, नियम और इसकी संपूर्ण जानकारी।
🌟 माँ नर्मदा परिक्रमा: मुख्य तथ्य एवं गाइड (Quick Overview)
परिक्रमा से जुड़ी मुख्य जानकारी एक नज़र में:
📌 नर्मदा परिक्रमा के 3 मुख्य नियम (Key Rules)
परिक्रमा के दौरान नर्मदा नदी को पार नहीं किया जाता, हमेशा नदी को अपने दाहिने ओर (दक्षिण तट पर जाते समय) रखकर यात्रा की जाती है।
यात्रा के दौरान पूरी तरह सात्विक आचरण रखें। प्रतिदिन माँ नर्मदा की आरती, पूजन और ‘नर्मदे हर’ का निरंतर संकीर्तन करें।
संकल्प के साथ नर्मदा जल का पात्र (कमंडल) साथ रखें, जिसे परिक्रमा पूर्ण होने पर पुनः संकल्प स्थान पर चढ़ाकर यात्रा का समापन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
हाँ, कई महिला श्रद्धालु अकेले या समूहों में नर्मदा परिक्रमा करती हैं। वाहन (कैब) से यात्रा करने पर सुरक्षा और सुविधा दोनों बहुत अच्छी रहती है।
प्राइवेट कैब या गाड़ी से नर्मदा परिक्रमा करने पर आमतौर पर 12 से 15 दिनों का समय लगता है, जिसमें सभी मुख्य पड़ाव और दर्शन सुगमता से पूरे हो जाते हैं।



