मां नर्मदा (रेवा) भारत की एकमात्र ऐसी नदी हैं जिनकी संपूर्ण परिक्रमा की जाती है। पुराणों में गंगा जी को ज्ञान, यमुना जी को भक्ति और मां नर्मदा को वैराग्य एवं मोक्ष का स्वरूप माना गया है। ओंकारेश्वर और अमरकंटक के बीच स्थित नर्मदा जी की परिक्रमा केवल एक भौगोलिक दूरी तय करना नहीं है, बल्कि यह अंतर्मन की खोज और आत्मा की शुद्धि का माध्यम है।
चाहे आप यह यात्रा पदयात्रा (पैदल) के रूप में करें या वाहन (कैब) के माध्यम से, आइए जानते हैं मां नर्मदा परिक्रमा के मुख्य आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक लाभ।
🌟 नर्मदा परिक्रमा लाभ: तीन स्तरीय प्रभाव (Tri-Level Benefits)
आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक स्तर पर मिलने वाले लाभों का विवरण:
📌 3 प्रमुख आध्यात्मिक अनुभव और साधना
परिक्रमा के दौरान हर कण और व्यक्ति में शिव व नर्मदा का रूप देखना, जिससे साधक के भीतर का अहंकार पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
नर्मदा तट के शांत वातावरण में निरंतर नाम-जप करते हुए चलना एक अनूठे ध्यान (Meditation) का रूप बन जाता है।
कम से कम साधनों में जीवन जीना सीखने से व्यक्ति को अहसास होता है कि असली सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं, सादगी में है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
परिक्रमा के समय निरंतर “ॐ नमः शिवाय” या “नर्मदे हर” का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी और फलदायी माना जाता है।
हाँ, नर्मदा तट पर बसे अधिकांश गांवों और आश्रमों में परिक्रमावासियों के लिए निशुल्क या न्यूनतम शुल्क पर रहने और सात्विक भोजन (सदाव्रत) की सुंदर व्यवस्था रहती है।



