सनातन धर्म में मां नर्मदा की परिक्रमा को अत्यंत पवित्र और मोक्षदायिनी माना गया है। नर्मदा नदी विश्व की एकमात्र ऐसी नदी हैं जिनकी संपूर्ण परिक्रमा की जाती है। श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग इस पावन परिक्रमा का मुख्य प्रारंभिक और समापन केंद्र है।
यदि आप ओंकारेश्वर से नर्मदा परिक्रमा की योजना बना रहे हैं, तो इस गाइड में जानें परिक्रमा के नियम, मार्ग, कुल दूरी, वाहन यात्रा के विकल्प और आवश्यक सावधानियां।
🌊 नर्मदा परिक्रमा: मुख्य विवरण एवं मार्ग तालिका
पैदल एवं वाहन (टैक्सी/बस) परिक्रमा की तुलना और मुख्य जानकारी:
📌 नर्मदा परिक्रमा के मुख्य नियम और सिद्धांत
परिक्रमा के दौरान मां नर्मदा को पार करना वर्जित है (केवल संगम स्थल या विशेष धार्मिक परिस्थिति को छोड़कर)। नदी हमेशा दाहिनी ओर रहती है।
यात्रा ओंकारेश्वर में नर्मदा स्नान, पूजन और संकल्प जल लेकर शुरू होती है। पूरी परिक्रमा के बाद पुनः ओंकारेश्वर आकर जल अर्पित किया जाता है।
परिक्रमा के दौरान पूर्ण सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य और मां नर्मदा के निरंतर ध्यान व “नर्मदे हर” के जप का विधान है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
कार्तिक पूर्णिमा से लेकर देवउठनी एकादशी के बाद (नवंबर से मार्च) का समय नर्मदा परिक्रमा के लिए सबसे अनुकूल और सुखद माना जाता है।
शास्त्रों और विद्वानों के अनुसार, यदि व्यक्ति भक्ति भावना, सात्विकता और सभी नियमों का पालन करते हुए गाड़ी से परिक्रमा करता है, तो मां नर्मदा की कृपा प्राप्त होती है।



